24. आप प्रवासी भारतीयों को मतदान का अधिकार क्यों देना चाहते हैं?
प्रवासी भारतीय दूसरे देशों में होते हुए भी भारत से सदा जुडाव महसूस करते हैं, उनकी जड़ें तो भारत में ही हैं. विदेश जाकर भी मौद्रिक और बौधिक सम्पदा निरंतर भारत में वापस भेजते हैं. भारत भेजे गए डॉलरों का आंकडा अरबों में जाता है.
इसके अलावा वे दूसरे देशों में हमारे अनौपचारिक सांस्कृतिक राजदूत हैं उनकी उपलब्धियों से हमारा सर भी गर्व से ऊँचा होता है, क्या देश की सेवा करने वाले, देश का नाम ऊँचा करने वाले लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित रखना उचित है? राजनैतिक रूप से उनकी संख्या गौण है, हमारा ये कदम तो सर्वथा उनके प्रति हमारे आदर और प्यार का प्रतीक मात्र होगा, जो उनके साथ-साथ हमें भी भारतीय होने का एहसास करवाएगा.
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13 December 2008
FAQ 23
23. क्या आप समान नागरिक संहिता लागू करेंगे?
नही, सभी धर्मों के अपने-अपने पर्सनल कानून हैं और लोगों के निजी मामलों जैसे शादी, तलाक, आदि के लिए इन सभी को हटाकर नया कानून लगाना सही नही होगा.
पर, हम एक आधुनिक पर्सनल कोड लाएगे जो आपसी सहमती पर आधारित होगा, यह एक कांट्रेक्ट (अनुबंध) की तरह होगा और कोर्ट में मान्य होगा, सभी विवादों का हल इसी के आधार पर निकाला जाएगा, उदहारण के लिए शादी के लिए इस कोड में शादी के बाद खर्चों को किस प्रकार बांटा जाए, बच्चों का लालन-पालन किस प्रकार किया जाएगा, तालक किस सूरत में लिया जा सकेगा, तलाक के बाद बच्चों की ज़िम्मेदारी किसको मिलेगी आदि बातों का समावेश होगा. दंपत्ति को इस कोड पर आधारित अनुबंध को कोर्ट में रजिस्टर (पंजीकृत) कराना होगा, यदि वो ऐसा नही करते हैं तो शासन उनकी शादी को अमान्य मानेगा और उनको दो अलग व्यक्ति ही मानेगा.
व्यक्ति को इस बात की भी स्वतंत्रता होगी की वो किसी भी कोड को न अपनाए, पर अगर व्यक्ति नए कोड को अपनाता ह तो उसका धार्मिक कोड उसपर लागो नही होगा.
नही, सभी धर्मों के अपने-अपने पर्सनल कानून हैं और लोगों के निजी मामलों जैसे शादी, तलाक, आदि के लिए इन सभी को हटाकर नया कानून लगाना सही नही होगा.
पर, हम एक आधुनिक पर्सनल कोड लाएगे जो आपसी सहमती पर आधारित होगा, यह एक कांट्रेक्ट (अनुबंध) की तरह होगा और कोर्ट में मान्य होगा, सभी विवादों का हल इसी के आधार पर निकाला जाएगा, उदहारण के लिए शादी के लिए इस कोड में शादी के बाद खर्चों को किस प्रकार बांटा जाए, बच्चों का लालन-पालन किस प्रकार किया जाएगा, तालक किस सूरत में लिया जा सकेगा, तलाक के बाद बच्चों की ज़िम्मेदारी किसको मिलेगी आदि बातों का समावेश होगा. दंपत्ति को इस कोड पर आधारित अनुबंध को कोर्ट में रजिस्टर (पंजीकृत) कराना होगा, यदि वो ऐसा नही करते हैं तो शासन उनकी शादी को अमान्य मानेगा और उनको दो अलग व्यक्ति ही मानेगा.
व्यक्ति को इस बात की भी स्वतंत्रता होगी की वो किसी भी कोड को न अपनाए, पर अगर व्यक्ति नए कोड को अपनाता ह तो उसका धार्मिक कोड उसपर लागो नही होगा.
FAQ 22
22. कश्मीर समस्या पर आपका रुख क्या है?
कश्मीर के अधिकाँश लोग शान्ति और आर्थिक समृद्धि चाहते हैं. केवल कुछ मौकापरस्त नेता ही अलगाव और आज़ादी की बात करते हैं और आतंकवाद का समर्थन करते हैं. इससे मजबूती के साथ निपटा जाना चाहिए, अनुच्छेद ३७० को हटाकर जम्मू-कश्मीर को अन्य सभी राज्यों की तरह भारत का अभिन्न अंग होने की मान्यता देनी चाहिए. धार्मिक और राजनैतिक तुष्टिकरण को पूरी तरह से ख़त्म किया जाना चाहिए, सरकार को सभी के साथ बराबरी का और समान व्यवहार करना चाहिए. सशस्त्र बलों द्वारा मुसलमानों के खिलाफ की गई ज्यादतियों, यदि कोई हो, को भी सख्ती से रोकना होगा.
पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में फैलाए गए आतंकवाद को दुनिया के सामने लाना होगा और इसके ख़िलाफ़ कठोरतम कदम उठाने होंगे.
कश्मीर के अधिकाँश लोग शान्ति और आर्थिक समृद्धि चाहते हैं. केवल कुछ मौकापरस्त नेता ही अलगाव और आज़ादी की बात करते हैं और आतंकवाद का समर्थन करते हैं. इससे मजबूती के साथ निपटा जाना चाहिए, अनुच्छेद ३७० को हटाकर जम्मू-कश्मीर को अन्य सभी राज्यों की तरह भारत का अभिन्न अंग होने की मान्यता देनी चाहिए. धार्मिक और राजनैतिक तुष्टिकरण को पूरी तरह से ख़त्म किया जाना चाहिए, सरकार को सभी के साथ बराबरी का और समान व्यवहार करना चाहिए. सशस्त्र बलों द्वारा मुसलमानों के खिलाफ की गई ज्यादतियों, यदि कोई हो, को भी सख्ती से रोकना होगा.
पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में फैलाए गए आतंकवाद को दुनिया के सामने लाना होगा और इसके ख़िलाफ़ कठोरतम कदम उठाने होंगे.
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