29. आप जजों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को कैसे रोकेंगे?
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी किए गए वैश्विक भ्रष्टाचार बैरोमीटर २००६ में ७७% भारतीयों ने माना की उनकी न्याय-पालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त है और ३६% लोगों ने काम के बदले रिश्वत देने की बात स्वीकारी. इस परिपेक्ष में जागो पार्टी की प्रस्तावित योजना:
१. न्यायिक चयन प्रकिर्या एक स्वतंत्र चयन समिति द्वारा.
२. नियुक्तियों का आधार योग्यता, चयन के सभी नियम और मानदंड सार्वजानिक, केवल उन्ही उम्मीदवारों को शामिल किया जाएगा जिनकी क्षमता और इमानदारी का लंबा रिकार्ड हो.
३. स्थानान्तरण के मानदंड बिल्कुल स्पष्ट होंगे जिससे इमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोगों को परेशान ना किया जा सके.
४. जजों के विरुद्ध लगाए आरोपों की सघन जांच एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा करवाई जाए.
५. जजों को हटाने की प्रक्रिया आसान की जाएगी और यह बिल्कुल पारदर्शी और निष्पक्ष, सख्त मानकों वाली होगी, अगर वहाँ भ्रष्टाचार पाया जाता है तो जज पर मुकदमा भी चलाया जाएगा.
६. जजों द्वारा दिए गए निर्णयों के स्तर को जांचने के लिए एक समिति होगी जो औचक निरिक्षण करके वस्तुस्थिति से सरकार और जनता को अवगत करावाएगी. यदि किसी जज के आदेशों या निर्णयों में न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है तो उसपर तुंरत कार्यवाही होगी.
७. यदि अपील के दौरान आदेश/निर्णय को बदलना पड़ता है तो जज के ख़िलाफ़ भी कार्यवाही की जाएगी.
८. जजों के वेतन, पेंशन आदि बाज़ार-मूल्यों पर और उनके काम के अनुसार दिया जाएगा.
९. न्यायिक प्रक्रिया में जजों के विवेक से लिए गए निर्णयों को कम से कम करना और उसके स्थान पर सभी निर्णय और सजाएं कानून में बदलाव करके स्पष्ट करना.
१०. कानूनों और अधिनियम की जटिलता और अनेकानेक संबधित कानूनों के फ़ैसला किसी भी ओर मुदा जा सकता है इसके कारण भी भ्रष्टाचार बढ़ता है. कानून को सरल बनाया जाएगा.
११. जैसा पहले भी कहा जा चुका है, समाजवाद पर आधारित कानून की आड़ लेकर कई लोग व्यवसायों और निजी उद्योगों को नुक्सान पहुँचाना (सही तौर पर पैसे वसूलना) चाहते हैं, धंधे को ध्यान में रखकर कई व्यवसायी कोर्ट के बाहर समझौता करके अपनी जान छुडाते हैं, इस तरह के सभी कानूनों को हटा दिया जाएगा.
जागो पार्टी हिन्दी वेबसाइट टाईटल-बार (बीटा) JAGO PARTY HINDI WEBSITE (BETA)
13 December 2008
FAQ 28
28. ३ महीनों में कोर्ट के फैसले आप कैसे सुनिश्चित करेंगे? और इतने सारे लंबित मामले हैं उनका क्या होगा?
वर्तमान में देश की सभी अदालतों में कुल ३ करोड़ मामले लंबित हैं, जिसमे से सुप्रीम कोर्ट में ४०,०००, सारे हाई कोर्टों में ३० लाख और निचली अदालतों में लगभग २.६० करोड़ मामले हैं.
इसका निपटारा हम निम्नलिखित तरीके से करना चाहते हैं
१. जनसंख्या के अनुपात में जजों की संख्या को लाना: वर्तमान में भारत में प्रति १० लाख लोगों पर १२ जज हैं, जबकि यू.के. में यह ५१ है, ऑस्ट्रेलिया में ५८, कनाडा में ७५ और अमेरिका में १०७. भारत को इस समय यह अनुपात ५० के करीब चाहिए, जिससे नए कोर्ट बनाये जा सकें और मौजूदा कोर्टों को २-३ परियों में २४ घंटे संचालित किया जा सके.
२. कोर्टों के २ महीने के अवकाश को ख़त्म करना.
३. सारी रिक्तियों को तुंरत भरना.
४. स्थगन को बहुत ही कठिन और खर्चीला बनाना जिससे दोनों पक्ष मामले को ताल ना पाएं.
५. गवाहों और पक्षों के बयानों की विडियो रिकार्डिंग को सबूत के तुअर पर मान्यता देना.
६. विशेष अदालतों के लिए विशेष-प्रशिक्षण प्राप्त जज.
७. मध्यस्थों और अदालत-पूर्व समझौते को अधिक प्रोत्साहन देना.
८. 'संदेह से परे' प्रणाली को बदलकर 'संभावनाओं की प्रधानता' प्रणाली करना.
९. एक समय सीमा के बाद यदि मामला कोर्ट में लंबित रहे तो उसके लिए जज को उत्तरदाई बनाना.
१०. कोर्ट के सभी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का कम्प्यूटरीकरण.
११. सिर्फ़ एक अपील का प्रावधान.
यहाँ ध्यान देने योग्य ये बात है की इस प्रकार के कई सुझाव पूर्व में कई समितियों और आयोगों द्वारा दिए जा चुके हैं, पर राजनैतिक कमोजोरियों और स्वार्थों के लिए इनको हमेशा दरकिनार किया जाता रहा.
इन सभी उपायों के अलावा एक उपाय यह भी है कि हम पुराने और गैर-ज़रूरी अधिनियमों और कानूनों को ख़त्म करें और इनसे होने वाले मुकदमों से बच जाएँ. इस समय इस तरह के कानूनों की कुल संख्या ३०,००० के करीब है, जैसे समाजवाद से प्रभावित भूमि अधिग्रहण के कानून, सामाजिक बदलाव लाने के लिए थोपे गए इन कानूनों से गरीब जनता का भला तो कुछ हुआ नही उल्टा सरकार जनता का पैसा मुक़दमे लड़ने में बरबाद करती रही.
जागो पार्टी शुरू से यह कहती आई है की व्यापार करना सरकार का काम नही वो व्यापारियों के लिए छोड़ देना चाहिए और सरकार को देश के लिए बेहद ज़रूरी कामों और सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए, हमारा मानना है की भारत का काम इन कानूनों के बिना ज्यादा अच्छे से चलेगा और इनको हटाना ही श्रेष्ठ विकल्प है. जागो पार्टी सरकार में आते ही लंबित मामलों को आपसी समझौते द्वारा जल्दी से जल्दी निपटाएगी और उपरोक्त सभी बदलाव हमारे सिस्टम में लाएगी.
वर्तमान में देश की सभी अदालतों में कुल ३ करोड़ मामले लंबित हैं, जिसमे से सुप्रीम कोर्ट में ४०,०००, सारे हाई कोर्टों में ३० लाख और निचली अदालतों में लगभग २.६० करोड़ मामले हैं.
इसका निपटारा हम निम्नलिखित तरीके से करना चाहते हैं
१. जनसंख्या के अनुपात में जजों की संख्या को लाना: वर्तमान में भारत में प्रति १० लाख लोगों पर १२ जज हैं, जबकि यू.के. में यह ५१ है, ऑस्ट्रेलिया में ५८, कनाडा में ७५ और अमेरिका में १०७. भारत को इस समय यह अनुपात ५० के करीब चाहिए, जिससे नए कोर्ट बनाये जा सकें और मौजूदा कोर्टों को २-३ परियों में २४ घंटे संचालित किया जा सके.
२. कोर्टों के २ महीने के अवकाश को ख़त्म करना.
३. सारी रिक्तियों को तुंरत भरना.
४. स्थगन को बहुत ही कठिन और खर्चीला बनाना जिससे दोनों पक्ष मामले को ताल ना पाएं.
५. गवाहों और पक्षों के बयानों की विडियो रिकार्डिंग को सबूत के तुअर पर मान्यता देना.
६. विशेष अदालतों के लिए विशेष-प्रशिक्षण प्राप्त जज.
७. मध्यस्थों और अदालत-पूर्व समझौते को अधिक प्रोत्साहन देना.
८. 'संदेह से परे' प्रणाली को बदलकर 'संभावनाओं की प्रधानता' प्रणाली करना.
९. एक समय सीमा के बाद यदि मामला कोर्ट में लंबित रहे तो उसके लिए जज को उत्तरदाई बनाना.
१०. कोर्ट के सभी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का कम्प्यूटरीकरण.
११. सिर्फ़ एक अपील का प्रावधान.
यहाँ ध्यान देने योग्य ये बात है की इस प्रकार के कई सुझाव पूर्व में कई समितियों और आयोगों द्वारा दिए जा चुके हैं, पर राजनैतिक कमोजोरियों और स्वार्थों के लिए इनको हमेशा दरकिनार किया जाता रहा.
इन सभी उपायों के अलावा एक उपाय यह भी है कि हम पुराने और गैर-ज़रूरी अधिनियमों और कानूनों को ख़त्म करें और इनसे होने वाले मुकदमों से बच जाएँ. इस समय इस तरह के कानूनों की कुल संख्या ३०,००० के करीब है, जैसे समाजवाद से प्रभावित भूमि अधिग्रहण के कानून, सामाजिक बदलाव लाने के लिए थोपे गए इन कानूनों से गरीब जनता का भला तो कुछ हुआ नही उल्टा सरकार जनता का पैसा मुक़दमे लड़ने में बरबाद करती रही.
जागो पार्टी शुरू से यह कहती आई है की व्यापार करना सरकार का काम नही वो व्यापारियों के लिए छोड़ देना चाहिए और सरकार को देश के लिए बेहद ज़रूरी कामों और सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए, हमारा मानना है की भारत का काम इन कानूनों के बिना ज्यादा अच्छे से चलेगा और इनको हटाना ही श्रेष्ठ विकल्प है. जागो पार्टी सरकार में आते ही लंबित मामलों को आपसी समझौते द्वारा जल्दी से जल्दी निपटाएगी और उपरोक्त सभी बदलाव हमारे सिस्टम में लाएगी.
FAQ 27
27. आप बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड का समर्थन करते हैं, क्यों?
वो इसलिए की बलात्कार हत्या से ज्यादा गंभीर है, पीड़ित महिला की हत्या की जाती है शारीरिक रूप से नही पर मानसिक और भावनात्मक रूप से. बलात्कार के बाद का जीवन एक क्रूर यातना बन जाता है जहाँ घावों को रोज़ कुरेदा जाता है और उनमे नमक छिड़का जाता है, हत्या भी इसके सामने बौनी लगती है.
और तो और भारत में सामाजिक कलंक के डर से बलात्कार की ९९% घटनाएँ कभी सामने ही नही आ पाती.
अपराधी इस बात को जानता है और निडर होकर अपराध करता है, जिस दिन से बलात्कारियों को फाँसी दी जाने लगेगी अपराधी अपराध करने से पहले सौ बार सोचेगा, महिलाओं के मनोबल में, आत्म-अवधारणा में और सामाजिक प्रतिष्ठा में जो बदलाव आएगा उसके तो क्या कहने.
वो इसलिए की बलात्कार हत्या से ज्यादा गंभीर है, पीड़ित महिला की हत्या की जाती है शारीरिक रूप से नही पर मानसिक और भावनात्मक रूप से. बलात्कार के बाद का जीवन एक क्रूर यातना बन जाता है जहाँ घावों को रोज़ कुरेदा जाता है और उनमे नमक छिड़का जाता है, हत्या भी इसके सामने बौनी लगती है.
और तो और भारत में सामाजिक कलंक के डर से बलात्कार की ९९% घटनाएँ कभी सामने ही नही आ पाती.
अपराधी इस बात को जानता है और निडर होकर अपराध करता है, जिस दिन से बलात्कारियों को फाँसी दी जाने लगेगी अपराधी अपराध करने से पहले सौ बार सोचेगा, महिलाओं के मनोबल में, आत्म-अवधारणा में और सामाजिक प्रतिष्ठा में जो बदलाव आएगा उसके तो क्या कहने.
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